सौचूहे खाकर बिल्ली हज को चली, कहावत को चरितार्थ करता प्रमोद तिवारी
शहडोल (संजय गर्ग) । मामला बाणगंगा वार्ड नंबर 17 मेला मैदान के पीछे चल रहे अवैध प्लाटिंग का है।
बता दें कि लगातार हम आपको संबंधित प्रकरण के हर एक पहलू से अवगत कराते आ रहे हैं।
आज हम संबंधित प्रकरण के उस पात्र के ऊपर प्रकाश डालेंगे जो इस पूरे प्रकरण में पहले तो पूरी तरीके से ठंडे बस्ते में दिखाई पड़ता है।
और फिर अचानक से ही उठकर इस पूरे मामले में आकर्षण का केंद्र बनने का प्रयास करता है।
बिंदु राम तिवारी के पुत्र सुरेंद्र व प्रमोद तिवारी दोनों ही शहडोल में निवासरत है।
बता दें कि दोनों भाई अपने पिता की अर्जित संपत्ति जो कि बाणगंगा मेला मैदान के पीछे खसरा नंबर 298,/1, 299/2 खसरा नंबर 300 की भूमि वहां स्थित है।
जोकि दोनों भाइयों के बीच वर्णित भूमि को लेकर 5 से 6 वर्ष से विवाद में चल रहा है। उक्त भूमि का प्रकरण सिविल न्यायालय में तीन अलग-अलग न्यायाधीशों के पास विचाराधीन है।
बावजूद इसके भी लगातार खसरा नंबर 300 के प्लाट में विराट अमर सेना का बोर्ड लगा कर भू माफिया अमर मिश्रा व पीड़ित का भाई प्रमोद तिवारी कूट रचित तरीके से बिना कॉलोनाइजर के अवैध पार्किंग करा कर उक्त भूमि का क्रय विक्रय कर रहे।
और ऐसा ही कुछ हाल 298 और 299 में भी है।
अब आते हैं इस पूरे प्रकरण के उस पात्र के ऊपर जिसका नाम प्रमोद तिवारी है।
प्रमोद तिवारी वह व्यक्ति है जिसके ऊपर 12 जुलाई 2019 को एनेस्थीसिया के इंजेक्शनओं का नशे के रूप में इस्तेमाल करते हुए । कोतवाली पुलिस की चेकिंग के दौरान रात्रि लगभग 8 बजे नगर के बगिया होटल से एनेस्थीसिया इंजेक्शन के पेटी के साथ रंगे हाथ पकड़ा गया था। जिसके बाद प्रमोद तिवारी एवम बिट्टू तिवारी के ऊपर नारकोटिक्स एक्ट के तहत धाराएं लगाकर कोतवाली में अपराध पंजीबद्ध किया गया था।
जिसमें उस समय टीआई राघवेंद्र द्विवेदी, के द्वारा उनके ऊपर कार्यवाही की गई थी।
अन्य माफियाओं के साथ मिलकर पहले भी प्रमोद तिवारी ने की पाल्टिंग
प्रमोद तिवारी जोकि पहले भी खसरा नंबर 298 ,299, 300 में प्रशांत गौतम निवासी छतवाई के साथ सांठगांठ कर भूमि पर पहले अवैध प्लाटिंग की उसके बाद उसका क्रय विक्रय करना चालू कर दिया।
जिसके बाद पिता बिंदु राम तिवारी ने खसरा नंबर 300 के प्लाट की पावर ऑफ अटॉर्नी पीड़ित सुरेंद्र तिवारी के नाम कर दी। जिसका साक्ष्य सुरेंद्र तिवारी के पास मौजूद है।
बाद में पिता द्वारा वर्ष 2021 में सुरेंद्र को बेदखल कर दिया।
एक बार फिर वर्ष 2023 में प्रमोद तिवारी के द्वारा अमर दीप मिश्रा के साथ-साथ बैठकर उसी भूमिका क्रय-विक्रय दोबारा शुरू कर दिया।
प्रमोद तिवारी इस बात की पुष्टि स्वयं कर रहे हैं कि अमरदीप मिश्रा आपसी विवाद के समझौते के लिए उनके बीच आया था।
तो बड़ा सवाल यह है कि यदि समझौते के लिए आया था तो 300 नंबर प्लाट में भूमाफिया अमरदिप मिश्रा को विराट अमर सेना का बोर्ड लगातार क्यों रखना पड़ा???????
जो कि यह जांच का विषय है?
और यदि दोनों भाई भूमि का क्रय विक्रय कर रहे हैं तो वह कैसे कर रहे है।जबकि मामला न्यायालय में विचाराधीन है।
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