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शहडोल : अंधों में एक काना राजा के तर्ज पर चल रहा है जिला प्रशासन , वरिष्ठ जिम्मेदारों की नाक के नीचे तेजी से खप रहा जिला शिक्षा अधिकारी का भ्रष्टाचारिक व्यापार

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अंधों में एक काना राजा के तर्ज पर चल रहा है जिला प्रशासन ,

वरिष्ठ जिम्मेदारों की नाक के नीचे तेजी से खप रहा जिला शिक्षा अधिकारी का भ्रष्टाचारिक व्यापार

शहडोल (संजय गर्ग) । ज्ञात होगी लगातार सुर्खियों में चल रहा नियम विरुद्ध तरीके से केंद्रा अध्यक्ष व सहायक केंद्रा अध्यक्षों की नियुक्ति का मामला हम अपने खबरों के माध्यम से आपके समक्ष रख रहे हैं। अब तक स्थानीय प्रशासन के जिम्मेदारों द्वारा इस मामले में कोई रुचि देखने को नहीं मिली जिससे हमें लगा कि एक बार फिर उनकी जमीर को टटोलने की हमें जरूरत है।

 

 मामला कुछ इस प्रकार 

दरअसल 28 जनवरी को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से आदेश जारी होता है । जिसमें लेख है कि प्रमुख सचिव, मध्यप्रदेश शासन स्कूल शिक्षा विभाग भोपाल के पत्र क्रमांक/654/ 1773270/2023/20-3 भोपाल, दिनांक 29.दिसंबर 2023 में प्राप्त निर्देशानुसार कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा मध्यप्रदेश माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा आयोजित की जाने वाली सत्र 2023-24 के हाईस्कूल / हायर सेकेण्डरी व अन्य परीक्षाओं हेतु आपको केन्द्राध्यक्ष / सहायक केन्द्राध्यक्ष नियुक्त किया गया है। अशा, ई.एल.सी. हाईस्कूल इन्दिरा चौक के पास, शहडोल म.प्र. के सभागार में दिनांक 30. जनवरी 2024 को समय अपरान्ह 12.00 बजे से नियुक्त केन्द्राध्यक्ष / सहायक केंद्राध्यक्षों का प्रशिक्षण आयोजित किया गया है।

इसके साथ ही माध्यमिक शिक्षा मंडल के समस्त हाई स्कूल व हायर सेकेंडरी परीक्षा हेतु सहायक के अंदर अध्यक्ष व केंद्र अध्यक्षों की सूची भी सामने आती है।

जिसमें कई ऐसे नाम भी सामने है जो की सूची में या कहिए इस पद हेतु अधिकृत नहीं है।

 साहब यह कहते हैं नियम 

दरअसल नियमों के अनुसार केंद्र अध्यक्षों व सहायक केंद्र अध्यक्षों के पद पर वह शिक्षक व प्राचार्य होते हैं जिनके पास लगभग 5 वर्ष की अनुभव अनिवार्य होता है।

किंतु सूची में कई ऐसे नाम है जिनकी कार्य अवधि एक वर्ष या दो वर्षो से अधिक नहीं है।

ऐसे में सारे नियमों को ताक पर रखकर एवं कलेक्टर व जिला पंचायत की आखों मे धूल झोंक कर नियम विरुद्ध तरीके से जिला शिक्षा अधिकारी शहडोल फूल सिंह मारपाची व उनके कार्यालय में पदस्थ उन्हीं के सहयोगियों ने इस कार्य को अंजाम दिया है।

 

 सूची में है इनके नाम 

इस पूरे मामले में सूची में कुछ नाम सामने आए हैं जिसमें मॉडल स्कूल कौआसराई में पदस्थ विद्या द्विवेदी जिनकी सेवा मात्र 2 साल है , परमेश मरावी मात्र 2 साल कार्य का अनुभव है और नियुक्ति केंद्र अध्यक्ष पद पर इसी प्रकार उदय सिंह मरावी , बुढार श्रीमती निधि ठाकुर , रेखा सिंह बकहो , मॉडल स्कूल बुढार प्रियंका साकेत , यह सभी कर्मचारियों की कार्य अवधि 2 वर्षों के ऊपर नहीं है इसके बावजूद भी इन कर्मचारियों नियुक्ति की गई। 

जबकि जिले में उच्च माध्यमिक व कई ऐसे अनुभवी कर्मचारी मौजूद हैं जिनकी नियुक्ति की जा सकती थी किंतु ऐसा नहीं हुआ।

 

 वरिष्ठ- कनिष्ठ का नहीं है कोई तालमेल

 

आपको बता दें कि इस पूरे फर्जीवाड़े में जो भी सूची जारी हुई है उनमें से कई ऐसे कर्मचारी हैं जिनकी नियुक्ति सन् 98 की है। और कुछ ऐसे हैं जो की हाल ही में वर्ष 2012 से लेकर 2016 तक के हैं इसमें भी जिला शिक्षा अधिकारी पी . एस . मारपाची ने अपना भ्रष्टाचार का जादू चलाया है। वह ऐसे की जो कर्मचारी सन् 1998 की भर्ती है उन्हें सहायक केंद्रा अध्यक्ष बनाया गया है। एवं जो कर्मचारी 2012 से 2016 के हैं उन्हें केंद्रा अध्यक्ष के पद पर नियुक्त कर दिया गया है। जो की यह स्पष्ट रूप से जिला शिक्षा अधिकारी शहडोल के भ्रष्टाचार का प्रत्यक्ष नमूना है।

 

 कार्यालय के यह साहब भी है भ्रष्टाचार में संलिप्त 

 

सूत्रों के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी शहडोल के कार्यालय में मुख्य लिपिक के पद पर पदस्थ शिवकुमार गुप्ता ने भी इस पूरे भ्रष्टाचार के खेल में फूल सिंह मारपची का पूरा सहयोग किया ।

एवं अपने पड़ोसी होने का पूरा फर्ज निभाया है।

इसी प्रकार कार्यालय में पदस्थ अन्य कर्मचारियों ने भी अपनी सहभागिता भ्रष्टाचार में निभाई है जिसका खुलासा बहुत जल्द अगले अंक में किया जाएगा।

 सवालों के घेरे में जिला प्रशासन

इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी ने द्वारा नोट शीट तैयार कर कलेक्टर एवं जिला पंचायत सीईओ से सिग्नेचर कराकर फाइल को आगे बढ़ा दिया।

जो की पूर्णता नियम विरुद्ध है।

किंतु बड़ा सवाल यह है कि क्या इसकी जानकारी कलेक्टर व जिला पंचायत सीईओ को नहीं थी और अगर थी तो फिर इतना बड़ा फर्जी बड़ा कैसे हो गया। जो कि कहीं ना कहीं जिला प्रशासन के कार्यशैली पर सावली निशान खड़ा कर रहा है।

 

 *कलेक्टर दे रही यह जवाब तो क्या??? पल्ला झाड़ करते जिम्मेदार* 

 

जब इस पूरे विषय को लेकर शहडोल कलेक्टर वंदना वैध से फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने मामले से पल्ला – झाड़ करते हुए। यह कहा कि इसके नोडल अधिकारी जिला पंचायत सीईओ राजेश जैन है आप उनसे बात कर लीजिए।

 

 इनकी प्रतिक्रिया

इस संबंध में जिला पंचायत सीईओ से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन उठाना जरूरी नहीं समझा ।

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