शहडोल: प्रमाणित भ्रष्टाचार पर कार्यवाही का इंतजार??? सेटिंग में लगे जिम्मेदार, जांच में पाई गई ग्राम पंचायत में वित्तीय अनियमिताएं , भुगतान पंजीयन समेत वित्तीय स्वीकृति के भी नहीं मिले कोई अभिलेख
प्रमाणित भ्रष्टाचार पर कार्यवाही का इंतजार??? सेटिंग में लगे जिम्मेदार,
जांच में पाई गई ग्राम पंचायत में वित्तीय अनियमिताएं , भुगतान पंजीयन समेत वित्तीय स्वीकृति के भी नहीं मिले कोई अभिलेख
शहडोल / गोहपारू।( संजय गर्ग)। ज्ञात हो कि लगातार ग्राम पंचायत लोढ़ी जनपद गोहपारू में सरपंच एवं सचिव के ऊपर वित्तीय अनियमिताओं के आरोप लग रहे थे।
जिसमें सरपंच सचिव के ऊपर ग्राम पंचायत में विकास कार्य के लिए प्रदत्त राशियों का जमकर दुरुपयोग करने की बात सामने आ रही थी।
जिस पर जिला पंचायत शहडोल से विशंभर पांडे (उपयंत्री) जन शिक्षा केंद्र एवं वरिष्ठ लेखा अधिकारी जिला पंचायत सुहेल महमूद सिद्दीकी ने ग्राम पंचायत की शिकायतों पर जांच की जाती है।
उक्त जांच में शिकायतों में सरपंच एवं सचिव के ऊपर कितनी अनियमिताओं के लग रहे आरोप काफी हद तक सिद्ध होते दिख रहे थे।
जिसका उल्लेख जांच प्रतिवेदन में जांच अधिकारियों ने किया है।
जिला पंचायत में पहुंचा जांच प्रतिवेदन
कार्यालय आदेश क्रमांक 44 31 में दिनांक 12 दिसंबर 2024 को ग्राम पंचायत लोढ़ी के पंचायत भवन में जांच करने गए जांच अधिकारियों के द्वारा 3 जनवरी 2025 को जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया है।
जिसमें कई हद तक ग्राम पंचायत लोढ़ी के सरपंच प्रभा सिंह व सचिव आशुतोष गौतम कि शिकायत के अनुसार भ्रष्टाचार प्रमाणित होता दिखता है।
जांच में सामने आए यह तथ्य
:ग्राम पंचायत सचिव आशुतोष गौतम द्वारा जांच दल के समक्ष केवल व्यय किये गये देयक प्रस्तुत किये गये अन्य कोई अभिलेख स्टेश्नरी पंजी, स्टोर पंजी भुगतान पंजी, वित्तीय स्वीकृति तकनीकी स्वीकृति आदेश, कार्यों से संबंधित फोटोग्राफ इत्यादि कुछ भी प्रस्तुत नहीं किया गया है। फोटोकांपी/फोटो के देयकों में सिर्फ कार्य बावत उक्त व्यय किये गये है। व्यय का विवरण अंकित नहीं किया गया है एवं इनके समर्थन में कोई अभिलेख भी प्रस्तुत नहीं किये गये है। विभिन्न कार्य के उपलक्ष्य में किये गये मिष्ठान वितरण एवं पंडाल इत्यादि पर किये गये व्ययों के समर्थन में कोई भी प्रमाण बावत अभिलेख प्रस्तुत नहीं किये गये है। स्टेशनरी पंजी एवं स्टोर पंजी प्रस्तुत न किये जाने के कारण यह प्रमाणित नहीं होता है कि देयकों में दिखाये गये स्टेश्नरी की एवं फर्नीचर एवं अन्य सामान वास्तव में प्राप्त हुआ है अथवा नहीं, साथ ही क्रय किये गये फर्नीचर कूलर, इन्वर्टर आदि का भी भौतिक अवलोकन जांच दल को नहीं कराया गया। इसी तरह कॅम्प्यूटर मरम्मत के नाम पर अत्यधिक व्यय किया गया है तथा लैपटॉप का देयक अवलोकन करने पर यह स्पष्ट नहीं है कि लैपटॉप के क्रय की क्या आवश्यकता थी तथा उसके देयक में प्रत्येक पार्ट की कीमत पृथक पृथक दर्शायी नहीं गई है। कम्प्यूटर से संबंधित देयक की जांच किसी कम्प्यूटर तकनीकी ज्ञान वाले व्यक्ति से कराया जाना उचित होगा। ग्राम पंचायत के सरपंच एवं सचिव द्वारा शासकीय राशि के व्यय में वित्तीय नियमों का पालन नहीं किया गया है।
कार्यवाही या फिर सेटिंग??
जिला पंचायत के जांच प्रतिवेदन सामने आने के बाद पूर्ण रूप से ग्राम पंचायत सचिव आशुतोष गौतम एवं सरपंच के ऊपर भ्रष्टाचार प्रमाणित हो रहा है।
लेकिन जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत हुए एक माह बीत चुका है बावजूद इसके अब – तक प्रतिवेदन सामने आने के बाद भी कार्यवाही नहीं हुई है। अपुष्ट सूत्रों की माने तो अतिरिक्त जिला पंचायत अधिकारी मुद्रिका सिंह के द्वारा जांच प्रतिवेदन को दबाने का प्रयास किया जा रहा है साथ ही कथित ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों को संरक्षण भी दिया जा रहा है।
ऐसा हम नहीं ऐसा हमारे सूत्र बताते हैं इतना ही नहीं सूत्रों से यह भी जानकारी सामने आ रही है कि जांच प्रतिवेदन केवल एक कोरमपूर्ति थी जिससे प्रमाणित भ्रष्टाचार व शासकीय राशि के दुरुपयोग का मूल्यांकन उचित स्तर तक किया जा सके इसके बाद कार्यवाही नहीं होगी बल्कि भ्रष्टाचारियों से तालमेल बैठाने का प्रयास किया जाएगा।
डबल प्रभार ने बढ़ाया मुद्रिका का भार
विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अतिरिक्त जिला पंचायत सीईओ का प्रभार एवं सोहागपुर जनपद सीईओ का प्रभार दोनों ही मुद्राका सिंह के पास है। इसके पूर्व साहब के पास बुढार जनपद कभी प्रभार था। लेकिन अब वर्तमान में दो प्रभार इनके पास है जिससे इनका भार बढ़ा हुआ है।
दिन भर में साहब के पास इतने मामले सामने आते हैं कि साहब फैसला नहीं कर पाते की कार्यवाही करें या फिर सेटिंग
और शायद यही कारण है कि जांच प्रतिवेदन के अनुरूप भ्रष्टाचार प्रमाणित होने के बावजूद एक माह बीतने को आया है लेकिन अब – तक उल्लिखित ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव के ऊपर कार्यवाही नहीं हो सकी है जिससे उनके हौसले बुलंद है।
