शहडोल : कोतवाली में पदस्थ एएसआई की संलिप्तता पर सवाल?: कानूनी हिरासत में रखे वाहनों के कलपुर्जों की हो रही चोरी, उठी जांच की मांग!
कोतवाली में पदस्थ एएसआई की संलिप्तता पर सवाल?: कानूनी हिरासत में रखे वाहनों के कलपुर्जों की हो रही चोरी, उठी जांच की मांग!
शहडोल (संजय गर्ग)। देश-भक्ति, जन-सेवा भाव को शिरोधार करने वाले पुलिस विभाग को आपने अक्सर, अपराध नियंत्रण और अपराधियों पर कानून शिंकजा कसते देखा होगा। इसके साथ ही कानून व व्यवस्था बनाए रखने, जनता की सुरक्षा के लिए सजगता सहित जन शिकायतों के निवारण करते हुए समाज में सद्भाव बनाए रखने की अहम भूमिका निभाते भी देखा और सुना होगा। लेकिन विचार करिए कि, खादी वर्दी धारण कर, कोई व्यक्ति अपने कर्तव्य से विमुख हो, एक पुलिस अधिकारी के पद को सुशोभित करते हुए ही अपराधिक गतिविधियों और कृत्यों को अंजाम दे! तो फिर यह समाज किस दिशा दूरी को तय करेगा? इतना ही नहीं, यदि यह काम उस मंदिर में हो, जहां जनता न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचती है! तो विषय शायद और भी गंभीर हो जाता है।
दरअसल, एक ऐसा ही मामला प्रकाश में आया है। जहां एक एएसआई कुछ इसी तर्ज पर अपने कर्तव्यनिष्ठा से परे कार्यप्रणाली को अंजाम दे रहा है। आपको बता दें कि, यह मामला शहडोल के सुदुर स्थिति किसी थाना का नहीं बल्कि संभागीय मुख्यालय स्थित कोतवाली थाना का है। ऐसे में यह और भी चिंतनीय और गंभीर मामला माना जा रहा है। चूंकि, उक्त मुख्यालय में जिले से लेकर संभाग स्तरीय उच्च अधिकारियों की उपस्थिति भी होती है। ऐसे में मुख्यालय में पदस्थ एक कनिष्ठ अधिकारी की ऐसी हरकत? संभवतः उसे अपने वरिष्ठ अधिकारियों की कार्रवाई को लेकर कोई भय नहीं है?
सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार, कोतवाली में पदस्थ यह एएसआई वहां जप्तशुदा रखें वाहनों से उसके उपयोगी पार्ट्स निकलवाकर स्वयं के उपयोग में लेता आ रहा है। यह खेल लगभग उसके इस थाने में तैनात होने के कुछ दिनों बाद से ही शुरू हुआ जो आज तलक अनवरत रूप में जारी है। मामले में अगर थाने में लगे सीसीटीवी फुटेज खंगालें जाएं, तो साहब का यह अपराधिक खेल दिख जाएगा। खैर, संबंधित में कौन सी अपराधिक धाराएं लगाई जा सकती हैं, पुलिस ही बता सकती है। बहरहाल यह भी बताते चलें दें कि, उक्त एएसआई स्वयं को विश्व और नाथ मानते हुए, आए दिन फरियादी व आरोपियों से सीधे तौर पर पैसे मांगने को लेकर भी हमेशा सुर्खियों में बना रहता है।
बताया गया है कि, एक स्थानीय मैकेनिक का सहयोग लेकर यह एएसआई थाना के जप्तशुदा वाहनों के स्पेयर पार्ट्स निकलवाता है। जिसका उपयोग स्वयं के लिए करता है। इसके साथ ही कुछ पार्ट्स ब्रिकी किए जाने की बात भी सामने आई है। बहरहाल, इस मामले में कितनी सच्चाई है, यह हम पुष्टि नहीं करते। लेकिन, मामले में जांच किए जाने की आवश्यकता जरूर महसूस की गई है। ताकि, सारा कुछ दूध और पानी की तरह साफ हो सके एवं यदि मामले में सच्चाई सामने आती है, तो भविष्य में इसकी पुनरावृत्ति न हो। अब देखना होगा कि, वरिष्ठ आला अधिकारी इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए कब और क्या एक्शन लेते हैं।
