S.K. Paswan
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शहडोल : जिले की कोयला खदानों में लापरवाही के कारण हुई मौतों के जिम्मेदार कॉलरी जीएम हैं: मनीष श्रीवास्तव

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जिले की कोयला खदानों में लापरवाही के कारण हुई मौतों के जिम्मेदार कॉलरी जीएम हैं: मनीष श्रीवास्तव

शहडोल। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी विधि विभाग एवं इंटक के प्रदेश उपाध्यक्ष मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि, शहडोल जिले में कॉलरी प्रबंधन की लापरवाही से बंद पड़ी कोयला खदानों में (ओपन कास्ट और अंडरग्राउंड) में लगातार दुर्घटनाएं हो रही है और लोगों की मौतें हो रही हैं,यह लापरवाही खराब प्रबंधन, पूर्वानुमान की कमी, और भ्रष्टाचार के कारण उत्पन्न हो रही है।

बंद कोयला खदानों में लापरवाही से कई दुर्घटनाएँ हो चुकी हैं, जिनमें पूर्व में सबसे प्रमुख शहडोल सोहागपुर एरिया के धनपुरी में हुई है, जहाँ कबाड़ चोरी करने घुसे सात लोगों की जहरीली गैस के रिसाव से मौत हो गई। इन घटनाओं में एसईसीएल (एसईसीएल) के प्रबंधन की लापरवाही सामने आई है। और अभी सोहागपुर क्षेत्र के अंतर्गत हमले ओसीएम में 11 अक्टूबर को इस हुए हादसे में 23 दिन बाद भी लापरवाह अधिकारियों और सोहागपुर एरिया के मुख्य महाप्रबंधक सीजीएम पर मामला दर्ज नहीं हो पाया है, इसमें मृतक का आज 23 दिन बाद भी पता नहीं चला।

मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि, लापरवाही का एक कारण खदानों को ठीक से बंद न करना और सुरक्षा नियमों का पालन न करना है। जांच में पुलिस ने साउथ ईस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) के बुढ़ार ग्रुप प्रबंधन को इस घटना के लिए जिम्मेदार ठहराया है। जबकि इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार सीधे-सीधे एसईसीएल सुहागपुर एरिया के मुख्य महाप्रबंधक सीजीएम होते हैं क्योंकि पूर्णतः उनकी जिम्मेदारी होती है इन सारी प्रक्रियाओं का पालन करवाना कारण यह भी है कि यह सभी सीजीएम बाहर से आते हैं और इनका शहडोल से कोई लेना-देना होता नहीं है, कॉलरी विभाग में इतना ज्यादा भ्रष्टाचार है कि जो भी मुख्य महाप्रबंधक आता है भ्रष्टाचार को प्राथमिकता देकर अपनी झोली भरकर यहां से निकल जाता है।

उन्होंने बताया कि,हजारों करोड़ का कोयला प्रतिमाह शहडोल संभाग से निकलकर देश के उद्योगों में जाता है जिसका कोई भी लाभ इस क्षेत्र को आज तक नही मिल पाना यहां का दुर्भाग्य और कॉलरी प्रबंधन में पदस्थ अधिकारियों की मिली भगत, भ्रष्टाचार और लूट का जीता जागता नमूना है।

उन्होंने बताया कि शहडोल पुलिस ने लोगों से बंद खदानों में सुरक्षा के लिए प्रवेश न करने की हमेशा अपील की है। लेकिन कॉलरी प्रबंधन मुख्य रूप से मुख्य महाप्रबंधक सीजीएम के लापरवाही पूर्ण रवैये के कारण,सुरक्षा नियमों का पालन न करना,खदानों को ठीक से बंद न करना और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन न करना लापरवाही का मुख्य कारण है।

मनीष श्रीवास्तव ने बताया कि,बंद पड़ी खुली कोयला खदानों में लापरवाही, जैसे कि सुरक्षा उपायों की कमी और गैर-जिम्मेदार तरीके से बंद करना, भविष्य में गंभीर परिणाम दे सकती है। इन खदानों के भराव न होने से पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए कई खतरे पैदा हो सकते हैं, जैसे कि जहरीली गैसों का उत्सर्जन और पानी का संदूषण। इन खदानों को सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से बंद करना महत्वपूर्ण है। 

मीथेन उत्सर्जन से भी कोयला खदानों में मीथेन जैसी जहरीली गैसें जमा हो सकती हैं, जिन्हें अगर ठीक से बाहर न निकाला जाए तो वे वायुमंडल में मिलकर पर्यावरणीय और सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा कर सकती हैं और बंद खदानों को ठीक से सुरक्षित न करने पर ढहने और भूस्खलन का खतरा बढ़ जाता है, जिससे लोगों की जान जोखिम में पड़ जाती है।

उन्होंने बताया कि,बंद खदानों में जमा पानी में भारी धातुएं और अन्य जहरीले तत्व हो सकते हैं, जो आसपास के जल स्रोतों को प्रदूषित कर सकते हैं।लावारिस खदानें जंगल और वन्यजीवों के लिए खतरा पैदा कर सकती हैं और पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान पहुंचा सकती हैं। 

 मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि प्रत्येक एरिया के मुख्य महाप्रबंधकों की यह जिम्मेदारी है कि वह सुरक्षित भराव और प्रबंधन सुरक्षा उपायों का पालन करवायें बंद खदानों को बंद करते समय सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन करना चाहिए, जिसमें खदान के मुहाने को बंद करना और खतरनाक गैसों को निकालना शामिल है। खदानों को बंद करने की प्रक्रिया को इस तरह से पूरा करना चाहिए कि भविष्य में किसी भी प्रकार की दुर्घटना से बचा जा सके।बंद खदानों की नियमित निगरानी की जानी चाहिए ताकि किसी भी संभावित जोखिम का पता लगाया जा सके और तुरंत निवारक उपाय किए जा सकें। इन खदानों को बंद करने के बाद, उन्हें पर्यावरण के अनुकूल बनाना और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को बहाल करने के प्रयास करना महत्वपूर्ण है।

मनीष श्रीवास्तव ने कहा कि हर तरह से एरिया के सीजीएम को बंद पड़ी कोयला खदानों के भराव और पर्यावरणी संतुलन बनाए जाने के लिए वृक्षारोपण व अन्य कार्य हेतु जिम्मेदार होते हैं,जैसा कि मैं ऊपर बताया है इस तरह की जिम्मेदारियां और घटनाओं के लिए पूरी तरह जिम्मेदार सभी एरिया के महाप्रबंधक सीजीएम और इन सब के ऊपर सीएमडी  जो कई मुख्य महाप्रबंधकों के ऊपर होते हैं,अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक (सीएमडी एसईसीएल) की पूरी पूरी जिम्मेदारी है कि इस तरह की घटनाओं को रोके और पुलिस प्रशासन से भी यह अनुरोध है की सीधे सीधे महाप्रबंधकों और सीएमडी के ऊपर एफआईआर दर्ज किया जाना चाहिए साथ ही एसईसीएल के पूरे क्षेत्र में जितने भी मुख्य महाप्रबंधक रहे हैं उन सब के भ्रष्टाचार और लापरवाहियों की गंभीर जांच होना भी अब वर्तमान परिस्थितियों में आवश्यक हो गया है।।

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