शहडोल :गरीब और मध्यमवर्गी लोगों के लिए कहीं सपना तो नहीं हो जाएगी मिठाई , त्योहारों की सेज पर महंगाई की मार , आसमान छूते दाम कर सकते हैं आपकी खुशियों को फीका
गरीब और मध्यमवर्गी लोगों के लिए कहीं सपना तो नहीं हो जाएगी मिठाई ,
त्योहारों की सेज पर महंगाई की मार , आसमान छूते दाम कर सकते हैं आपकी खुशियों को फीका
शहडोल (संजय गर्ग)। इन दिनों देश में चीनी का मुद्दा गर्माया हुआ है लगातार चीनी की बढ़ती कीमतों ने जिस प्रकार से गरीब और मध्यम वर्गी लोगों के जेब पर डाका डाला है उसे देखकर ऐसा लगता है कि इस त्यौहार के सीजन में मिठाइयां सपना बनकर रह जाएगी।
हालांकि केंद्र सरकार का यह दावा है कि जिस चीनी को हम निर्यात करते थे। अब उन्हें हम विदेशों से आयात करेंगे।
जो चीनी कभी ₹20 प्रति किलो से लेकर 30 से ₹35 प्रति किलो के दर से मार्केट में बेची जाती थी।
2014 के बाद वैसे थे 35 से 48 और फिर 2026 तक आते-आते 48 से सीधा 70 के पार पहुंचने को है।
हमें इतिहास नहीं भुलना चाहिए। जिस प्रकार इस देश की राजनीति में प्याज के बढ़ते दामों ने सत्ता पलट कर दिया था क्या एक बार फिर 2026 में या यू कहें 2029 तक यह काम अब चीनी कर दिखाएंगी। यदि यही हाल रहा आया तो ।
खाद्य़ तेल व चीनी जैसे रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीजों के बढ़ते दाम
खाद्य पदार्थ जैसे खाद्य़ तेल , चीनी , दाल , चावल , आटा , एवं लोगों के घरेलू उपयोग में आने वाली हर एक खाद्य पदार्थ की कीमत बढ़ती जा रही है।
जहां एक तरफ जीएसटी और सीजीएसटी ने मध्यम वर्गी परिवारों के बजट को हिला दिया। वही अब इस त्यौहार के सीजन में अनेक प्रकार के खाद्य पदार्थों के नाम बढ़ गए हैं।
ऐसे में इन्हें काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
लेकिन सवाल यह है कि यह महंगाई आखिर दिन-ब-दिन कैसे बढ़ रही है। और इसका जिम्मेदार कौन है।
और आखिर वह कौन लोग हैं जो 56 इंच की सरकार में चीनी समेत अन्य खाद्य पदार्थों की कालाबाजारी कर रहे हैं।
वहीं चीनी की बढ़ती कालाबाजारी के चलते मिठाइयों के दामों में वृद्धि होती जा रही है।
मध्य वर्गी लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही बढ़ती महंगाई
भारत सरकार के पीईबी के 2026 के रिपोर्ट के अनुसार 31% लोग मिडिल क्लास के दायरे में आते हैं या नहींभारत की करीब 146 करोड़ आबादी में लगभग 45 करोड़ लोग मिडिल क्लास के आसपास आते हैं। यदि सरल भाषा में समझा जाए तो भारत में हर तीन में से एक व्यक्ति मिडिल क्लास की कैटेगरी में आता है।
ऐसे में सरकार को यह सोचना चाहिए कि महंगाई को नियंत्रित किया जाए।
खासकर उन चीजों के दाम कम रखे जाएं जो रोज मर्दा की जिंदगी में लोगों के काम आती है।
क्योंकि वर्तमान समय में लोगों की जेब का बजन से ज्यादा लोगों के किचन का बजट है।
फिलहाल तो यही कहेंगे कि यदि आप त्यौहार के सीजन में मिठाइयां या फिर राशन का सामान लेने जा रहे हैं तो अपनी जेब को जरा भारी रखिएगा साहब !
