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शहडोल :भारतीय सनातन संस्कृति का मुख्य आधार है गुरु : निरंजन सागर महाराज , जैन समाज द्वारा नगर के भारत माता विद्यालय में शिक्षकों के लिए कार्यशाला  का किया गया आयोजन

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भारतीय सनातन संस्कृति का मुख्य आधार है गुरु : निरंजन सागर महाराज

 जैन समाज द्वारा नगर के भारत माता विद्यालय में शिक्षकों के लिए कार्यशाला  का किया गया आयोजन

शहडोल (संजय गर्ग) ।  राष्ट्रहित चिंतक आचार्य गुरुवर  108 विद्यासागर  महाराज के शिष्य पूज्य मुनिश्री निरंजन सागर  महाराज के सानिध्य में जैन समाज शहडोल द्वारा एक शिक्षको के लिए कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसमें नगर के भारत माता विद्यालय एवम जिला महिला समिति विद्यालय के शिक्षको को मुनिश्री द्वारा तीन अहम बिंदुओं के बारे में बताया गया।

 जिसमे पॉजिटिव थॉट जनरेटिंग प्रोसेस, स्टोरी मेकिंग प्रोसेस, ब्रेन इंप्रूवमेंट प्रोसेस इन तीनो बिंदुओं पर मुनिश्री ने उदाहरण सहित टीचरों को करके सिखाया और इसे कैसे हम बच्चों को समझा सकते हैं बताया।

 गुरु के ही मार्गदर्शन से शिष्य बनता है महान 

 पॉजिटिव थॉट जनरेटिंग प्रोसेस का उदाहरण बताते हुए द्रोणाचार्य को लेकर महाराज  ने कहां की सभी जन द्रोणाचार्य को दोषी मानते हैं कि उसने एकलव्य का अंगूठा ले लिया, परंतु अगर आप सकारात्मक सोच से देखे तो उन्हीं द्रोणाचार्य की वजह से एकलव्य प्रसिद्ध हुआ है। मुनि  ने और अधिक चर्चा करते हुए बताया कि भारतीय सनातन संस्कृति का मुख्य आधार है गुरु।  गुरु की भूमिका का कोई दूसरा पर्याय नहीं है। आज भी जितने भी महान व्यक्ति हैं इन सभी के जीवन में कोई ना कोई गुरु अवश्य रहा है। जिनके मार्गदर्शन में वह व्यक्ति महान बना है। चाणक्य के बिना चंद्रगुप्त मौर्य कभी भी इतना महान शासक नहीं बन सकता था। शिक्षक की भूमिका न कभी कम हुई है न होगी। इस कार्यशाला के लिए भारत माता विद्यालय के प्राचार्य किशोर श्रीवास्तव  एवम जिला महिला समिति के प्राचार्य  ने भी धन्यवाद व्यक्त किया।

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