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शहडोल : भ्रष्टाचार का चारागाह बना जिले का जनजातिय कार्य विभाग कमीशन के आरोप , तो क्या ??? गांधी जी के फेरे में जांच पड़ी अंधेरे में, 2 करोड़ 87 लाख के कितने हिस्सेदार

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भ्रष्टाचार का चारागाह बना जिले का जनजातिय कार्य विभाग कमीशन के लगे आरोप

तो क्या ??? गांधी जी के फेरे में जांच पड़ी अंधेरे में, 2 करोड़ 87 लाख के कितने हिस्सेदार 

 

शहडोल (संजय गर्ग)। अहंकार और स्वाभिमान में बड़ा अंतर होता है। जो व्यक्ति को सही और गलत का अंतर सीखता हैं। लेकिन कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने स्वाभिमान को पूर्णता अहंकार का पर्यायवाची बना दिया है। 

और विभाग को स्वयं की जागीर समझकर विभागीय खजाने को खाली करने में लगे हुए हैं। यह आरोप हमारे नहीं ऐसा हमारे सूत्रों का कहना है। 

 भ्रष्टाचारियों को संरक्षण क्यों 

दरअसल पूरा मामला सीएम राइज विद्यालय जयसिंहनगर के पूर्व प्राचार्य कोकिला से संबंधित है जिसमें का कहना है कि पूर्व प्राचार्य को विद्यालय में प्रबंधन के शासकीय दुकानों के किराए नवीन अनुबंध में लापरवाही समेत वित्तीय अभिलेखों में अनियमिता समेत एमपी टॉस पोर्टल में छात्रवृत्ति के भुगतान में गड़बड़ी के चलते निलंबित कर दिया गया था निलंबन के कुछ समय पश्चात बहाल कर उच्च माध्यमिक विद्यालय खानौधी में कोकिला को भेज दिया गया। लेकिन विभागीय जांच संधारित् कर जांचकर्ता अधिकारी सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग को बनाया गया इसके बाद भी कार्यवाही विभागीय जांच ठंडे बस्ते में पड़ गई।

इसके बाद जांच कर्ता द्वारा भ्रष्टाचार के आरोप में निलंबित हुए प्राचार्य को विभागीय जांच में संरक्षित करने के दर्जनों आरोप सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग के ऊपर लगने लगे हैं। हालांकि लेकिन आरोपों की पुष्टि एमपी आयुष न्यूज़ नहीं करता।

 2 करोड़ 87 लाख की शासकीय राशि मे बराबर की साझेदारी

जन चर्चा और विशवस्त सूत्रों के अनुसार सीएम राइज जयसिंहनगर में पूर्व प्राचार्य डीपी कोकिला के कार्यकाल के दौरान विद्यालय मरम्मत कार्य हेतु 2 करोड़ 87 लख रुपए की शासकीय राशि का आवंटन विद्यालय में हुआ जिसमें पूर्व प्राचार्य कोकिला एवं सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग शहडोल के द्वारा भ्रष्टाचार की काली स्याही से विद्यालय की दीवारों को रंगने का कार्य किया गया। जिसकी शिकायत मानव अधिकार संगठन के संभागीय अध्यक्ष रमाकांत तिवारी ने की थी। 

यही कारण है कि दोनों की आपसी तालमेल के चलते विद्यालय के पूर्व प्राचार्य व विभाग के जिम्मेदार सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग के द्वारा डीपी को किला को विभागीय जांच में बचाने का कार्य किया गया। जबकि वित्तीय अभिलेखों में गड़बड़ी एसडीएम की जांच के बाद उजागर हुई थी। और पूर्व प्राचार्य कोकिला निलंबित हुए। बावजूद इसके

एसडीएम के जांच प्रतिवेदन और विभागीय जांच अधिकारी सहायक आयुक्त के जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से तत्कालीन प्राचार्य को बचाने की कोशिश की जा रही है। जिसका कारण मरम्मत कार्य में किए गए भ्रष्टाचार पर पर्दा डालने के लिए चल रहा है। 

 चारागाह बना जनजातीय विभाग का शहडोल कार्यालय

विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है की वर्तमान में जनजातिय कार्य विभाग का कार्यालय भ्रष्टाचार का चारागाह बन गया है जहां पर प्रत्येक कामों के लिए परसेंटेज के हिसाब से भ्रष्टाचार की रकम वसूली की जाती है। रकम वसूली का अड्डा बना विभाग जहां पर शिष्यवृत्ति के देयक कि राशि में हस्ताक्षर हेतु अधीक्षकों से 10% इसी प्रकार विशिष्ट संस्था से 15% , निर्माण कार्य में 20% , खरीदी के कार्यों में 20% एवं अन्य कार्यों के 10% की राशि कर्मचारीयों व अधिकारियों पर दबाव बनाकर जनजातिय कार्य विभाग में बैठे जिम्मेदारों के द्वारा वसूली जाती है । हालांकि रकम वसूली के इन आरोपों की पुष्टि हम नहीं करते जो कि यह पूरा मामला जांच का है जांच होने पर खुद-ब-खुद सर का सारा खेल स्पष्ट हो जाएगा। 

 हाथी के दांत दिखाने के और खाने के और 

लगातार जनजातिय कार्य विभाग शहडोल में अनियमिताओं का दौर चल रहा है। पहले तो विभागीय जांच में फंसे कर्मचारियों से गांधी जी के फेर में संबंध बनाकर उन्हें संरक्षित करना और फिर कार्यालय में कर्मचारी से विभागीय कार्यों को पूर्ण करने के लिए रकम वसूली के आरोप इसके साथ ही मरम्मत कार्यों में भ्रष्टाचार इन सभी मामलों में कहीं न कहीं विभागीय ज़िम्मेदार कटघरे में खड़े नजर आ रहे हैं। 

ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि जनजातिय के हालातो की तस्वीर में कैसे सुधार होगा यह बड़ा सवाल है जो अभी पिछले दिनों सोशल मीडिया पर झूठी वाहवाही बटोर रहे थे। जिससे कि प्रशासन के कृपा पात्र बना जा सके। पर हकीकत कुछ और ही नजर आती है। हालांकि संपूर्ण विषय की बारीकी से जांच हो तो ही पूरा मामला स्पष्ट रूप से सामने आएगा।

 इनकी प्रतिक्रिया

पूर्व प्राचार्य कि जो जांच उसमें आप पहले प्रेजेंटिंग ऑफिसर से बात करिए उन्हीं के रिपोर्ट के आधार पर हम कार्य कर रहे हैं कुछ गवाह है जो सामने नहीं आ रहे हैं। और रही बात कार्यालय में कमीशन की तो कार्यालय में सभी जगह सीसीटीव लगें हैं। यह जो आरोप है यह सारे निराधार हैं इसका मैं खंडन करता हूं। 

 आनंद राय सिन्हा ( सहायक आयुक्त) जनजातिय कार्य विभाग शहडोल

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