शहडोल : कारण बताओं नोटिस को बनाया बचाव का हथियार , क्यों कार्यवाही से गुरेज ,तो मलाईदार खुरचन के शिकंजे में फंसे जिम्मेदार , विभागीय नियमों की अर्थी पर सजी स्वैच्छिक स्थानांतरण , नियुक्ति और प्रभार
कारण बताओं नोटिस को बनाया बचाव का हथियार , क्यों कार्यवाही से गुरेज ,
तो मलाईदार खुरचन के शिकंजे में फंसे जिम्मेदार , विभागीय नियमों की अर्थी पर सजी स्वैच्छिक स्थानांतरण , नियुक्ति और प्रभार
शहडोल। जनजातीय कार्य विभाग के कार्यालय से लेकर विकासखंड जयसिंहनगर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में मलाईदार खुरचन के चर्चा जोरों पर है।
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार यहां पर जिस प्रकार मलाईदार खुरचन के आदान-प्रदान से विभागीय नियमों की अर्थी पर सजा प्राथमिक शिक्षक के स्वैच्छिक स्थानांतरण एवं उसे माध्यमिक शाला का प्रभार दिए जाने से लेकर और भी कई अनियमिताएं सामने आई हैं यदि पूरे मामले की जांच हो जाए तो हो सकता है कि प्राथमिक शिक्षक की नियुक्ति भी रद्द हो सकती है ऐसा हम ही ऐसा हमारे सूत्र बताते हैं।
इतना ही नहीं जिस तरह पड़े पैमाने में मलाईदार खुरचन की चर्चा इन दिनों जिले के जनजातीय कार्य विभाग के दफ्तर से निकाल कर सामने आ रही है उसकी मिठास कहीं ना कहीं अधिकारियों के गले की फांस भी बन सकती है।
दरअसल है पूरा मामला जयसिंहनगर विकासखंड से सामने आया है जहां पर प्राथमिक शिक्षक प्रभार का देवता बनकर बैठा हुआ है। वर्ग 3 का कर्मचारी होने के बावजूद भी संबंधित प्राथमिक शिक्षक को हायर सेकेंडरी में पदस्थ कर दिया गया है वह भी पूरे नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए।
इतना ही नहीं जब मामले की शिकायत विभाग के आका तक पहुंची तो कार्यवाही के नाम पर नोटिस को बचाव का हथियार बनाया गया।
विभाग द्वारा जारी नोटिस के अनुरूप अब तक कार्यवाही प्रचलन में आ जानी चाहिए थी लेकिन एक सप्ताह से ऊपर होने के बावजूद भी अब तक संबंधित मामले में विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
गुरुजी से फर्जी नियुक्ति कि भी आशंका
इतना ही नहीं मामले में मलाईदार खुरचन बांटने वाला प्राथमिक शिक्षक सत्येंद्र की नियुक्तियों को लेकर भी बड़े पैमाने में यह शंका जताई जा रही है कि कहीं ना कहीं इसकी नियुक्ति फर्जी है जो की सन 2002 में गुरु जी के माध्यम से जनपद स्तर से नियुक्ति की गई थी लेकिन जनपद स्टार से संबंधित प्राथमिक शिक्षक के आदेश में कोई भी कार्यवाही जनपद स्तर से नहीं हुई । अपुष्ट सूत्रों की माने तो भर्ती प्रक्रिया के दौरान जनपद स्तर से जो कार्यवाही होनी थी उसमें फर्जी दस्तखत किए गए हैं।
नियमों की तिलांजलि
संबद्ध प्राथमिक शिक्षक सत्येंद्र की नियुक्ति शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में सारे नियमों की और कार्य की बलि देते हुए कर दी गई है।
दरअसल डेमो के अनुसार किसी भी प्राथमिक शिक्षक की नियुक्ति हायर सेकेंडरी में नहीं की जा सकती जब तक की वहां पर उसे पद के विरुद्ध लैब टेक्नीशियन का पद मौजूद न हो बावजूद इसके संबंधित व्यक्ति की नियुक्ति वहां पर की गई और वह भी खेल शिक्षक के पद पर जिस पर खुद संबंधित शिक्षक ने अखबार में खबर प्रकाशित करवाई है।
जबकि खेल शिक्षक के लिए बीपीएस डिग्री होना अति आवश्यक है।
विभाग से किया सवाल तो नही मिला तर्क संगत जवाब
जब भी भाग्य अधिकारियों को संबंधित मामले की जानकारी संगत कराया गया और उसमें उनसे प्राथमिक शिक्षक की नियुक्ति हायर सेकेंडरी में कैसे कर दी गई एवं स्वैच्छिक स्थानांतरण पर सवाल किए गए तो विभाग के जिम्मेदारों का कहना है कि यह खेल शिक्षक नहीं प्राथमिक शिक्षक है। और उसे हटाया नहीं जा सकता क्योंकि उसने अपनी स्वेच्छा से स्थानांतरण लिया है।
पर सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब विभागीय नियमों में ऐसा कोई नियम ही नहीं है तो फिर यह स्थानांतरण कैसे हो गया। ???????
विभागीय नोटिस यां बचाव का जरिया
दिनांक 8 जुलाई 2026 को कार्यालय सहायक आयुक्त जनजाति कार्य विभाग शहडोल द्वारा पत्र क्रमांक 3659 , एवं 3660 में हायर सेकेंडरी प्राचार्य एवं विकासखंड शिक्षा अधिकारी जयसिंहनगर को प्रतिलिपि करते हुए। पूरे मामले में संदिग्ध प्राथमिक शिक्षक सत्येंद्र को कारण बताओं नोटिस जारी खेल शिक्षक के पद पर हायर सेकेंडरी में पदस्थ होने की खबर अखबार में प्रकाशित करने को लेकर संबंधित कृति को मध्य प्रदेश सिविल सेवा अधिनियम 1965 के विपरीत एवं सिविल सेवा वर्गीकरण नियंत्रण एवं अपील के अधिनियम 1966 के तहत दंडनीय बताकर साथ दिवस में स्पष्टीकरण मांगा था लेकिन आज 17 दिन बीत जाने के बावजूद भी संबंधित शिक्षक पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।
जो कि कहीं ना कहीं विभाग के संरक्षण की पटकथा को बयां कर रहा है। ऐसा कहना अतिसंयोक्ति नहीं होगी।
पर साहब को बता दें कि मलाईदार खुरचन जितना मीठा और चिकना होता है उतना ही उसको ज्यादा खा लेने से वह पेट के लिए गरीइस्ट होता है।
प्रभार की मिठाई ऐसी
मलाईदार खुरचन की जगह प्रभार की मिठाई बांटी गई। बता दे की माध्यमिक शाला का प्रभार अभी तक सतेंद्र के पास ही है ।
इनकी प्रतिक्रिया
इस पर अभी कोई कार्यवाही नहीं हुई है । अभी हम लोग सिर्फ पदोन्नति के कार्य में व्यस्त हैं। सायद उसका जवाब आ गया है। …. मैं विद्यालय के प्राचार्य से पूछ कर बताता हूं।
आनंद राय सिन्हा ( सहायक आयुक्त) जनजातीय कार्य विभाग शहडोल ।
