शहडोल: संतान पालन अवकाश , बना रजनी के जॉइनिंग का ब्रह्मास्त्र…. सूत्र, तो क्या ?????? 3 संतान के नियमों की अर्थी पर सजी शिक्षा विभाग में घोटाले की रीत
संतान पालन अवकाश , बना रजनी के जॉइनिंग का ब्रह्मास्त्र…. सूत्र, तो क्या ?????? 3 संतान के नियमों की अर्थी पर सजी शिक्षा विभाग में घोटाले की रीत
शहडोल। शिक्षा विभाग में घोटाला ऐसा जिसने 26 जनवरी 2001 के बाद तीन संतान वाले नियमों को मानो विभागीय पैमानों के तहत तिलांजलि देखकर उनकी अर्थी सजा दी। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में वसूली भाई नंबर 1 शिव के कृपा पात्र से यह मामला सीधा जुड़ा हुआ है जहां पर संतान पालन अवकाश रजनी गुप्ता के लिए शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापिका के पद पर जॉइनिंग का ब्रह्मास्त्र बनी हुई। सवाल यह है कि क्या गांधी जी के फेर में नतमस्तक शिक्षा विभाग की उच्च अधिकारियों की नियम कानून की अपनी ही एक रीत है। दरअसल पूरा मामला सोहागपुर कन्या संकुल के अंतर्गत आने वाले मंदिर टोला में सहायक अध्यापिका रजनी गुप्ता की जॉइनिंग से जुड़ा है। जहां पर आरोप है कि तीन संतान संबंधित नियमों का हवाला देकर जहां कुछ अभ्यर्थियों को नियुक्ति के अवसर से वंचित कर दिया गया वहीं रजनी गुप्ता को किन नियमों के तहत प्रायोजित तरीके से नियुक्ति दे दी गई। इतना ही नहीं मामले में सवाल यह है कि यदि संबंधित नियम अन्य अभ्यर्थियों पर लागू किया गया, तो रजनी गुप्ता की जॉइनिंग किस प्रावधान और किस आदेश के तहत कराई गई, वहीं यदि उनकी जॉइनिंग नियमानुसार हुई है, तो विभाग को संबंधित नियम और निर्णय का वैधानिक आधार स्पष्ट करना चाहिए।
नियम सबके लिए समान या अलग-अलग मापदंड
नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और समानता बेहद जरूरी है। ऐसे में शिक्षा विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित नियुक्ति किस आदेश के आधार पर हुई, दस्तावेजों का सत्यापन किस अधिकारी ने किया और तीन संतान संबंधी नियम के संबंध में क्या परीक्षण किया गया। साथ ही, समान परिस्थितियों वाले अन्य अभ्यर्थियों के मामलों में अपनाई गई प्रक्रिया का भी खुलासा होना चाहिए।
‘ चौकड़ी’ की भूमिका पर भी उठ रहे सवाल
विभागीय हलकों में कथित प्रभावशाली लोगों की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं सामने आ रही हैं। जिला शिक्षा अधिकारी अतुल चौधरी के करीबी सलाहकार बताए जाने वाले एक व्यक्ति की कथित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में आवश्यक है कि विभागीय निर्णयों में उनकी किसी भूमिका की शिकायत सामने आने पर तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
दस्तावेजों से दूर होगा संदेह
शिक्षा विभाग को इस मामले में केवल मौखिक सफाई देने के बजाय नियुक्ति आदेश, पात्रता परीक्षण, दस्तावेज सत्यापन और संबंधित नियमों के अनुपालन की स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। यदि प्रक्रिया नियमसम्मत है, तो दस्तावेजों के आधार पर स्थिति साफ हो सकती है। वहीं, किसी स्तर पर अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारी तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब निगाहें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग पर हैं। क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच कराकर उठ रहे सवालों का जवाब दिया जाएगा, या मामला केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित रह जाएगा फिलहाल, रजनी गुप्ता की जॉइनिंग और तीन संतान संबंधी नियम के अनुपालन को लेकर उठे सवालों का जवाब संबंधित दस्तावेजों और विभागीय स्पष्टीकरण से ही मिल सकेगा।
