जयसिंहनगर : जयसिंह नगर लैंप्स प्रबंधक के सह पर चल रहा है लाखों का राशन घोटाला , गरीबों के पेट पर लैंप्स प्रबंधक की लात , जांच प्रतिवेदन के बाद भी कार्यवाही शुन्य ।
जयसिंह नगर लैंप्स प्रबंधक के सह पर चल रहा है लाखों का राशन घोटाला ,
गरीबों के पेट पर लैंप्स प्रबंधक की लात ,
जांच प्रतिवेदन के बाद भी कार्यवाही शुन्य ।
जयसिंह नगर (संजय गर्ग) । मामला जिले के जयसिंहनगर लैंप्स का है जहां पर लैम्स्प प्रबंधक द्वारा अंधेर गर्दी मचाई जा रही।
दरअसल जयसिंह नगर लैंप्स के द्वारा जयसिंहनगर क्षेत्र अंतर्गत विभिन्न ग्रामों में शासकीय उचित मूल्य की दुकान संचालित की जाती है जिसमें हर माह बीपीएल धारियों को राशन उपलब्ध कराया जाता है।
तद संबंध में ग्राम पंचायत मोहनी में मामला प्रकाश में आया है जहां पर ग्राम वासियों को प्रत्येक माह का राशन
उपलब्ध नहीं कराया जाता है। जिसकी शिकायत ग्राम पंचायत द्वारा फूड इंस्पेक्टर को की जाती है।
फूड इंस्पेक्टर को की जाती है एवं फूड इंस्पेक्टर द्वारा मामले की जांच की जाती है और जांच में 54 कुंटल खाद्यान्न कम पाया गया।
जिसके बाद फूड इंस्पेक्टर सेन द्वारा जांच प्रतिवेदन तैयार कर सरपंच और उपसरपंच मोहनी से उसे सत्यापित कराया गया और आगे कार्यवाही हेतु प्रचलित किया गया।
ग्राम पंचायत मोहानी जयसिंह नगर लैंप्स प्रबंधक तीरथ शुक्ला के द्वारा ना सिर्फ मोहनी अपितु जयसिंहनगर क्षेत्र के अंतर्गत समस्त ग्राम पंचायतों में राशन वितरण को लेकर भारी अनियमितताएं एवं भ्रष्टाचारी मचाई गई है।
बावजूद इसके उक्त प्रतिवेदन पर कोई कार्यवाही नहीं होती हैं।
उप सरपंच द्वारा बताया गया कि हमने मौखिक रूप से फोन से शिकायत की गई थी।
एवं मामले की जांच फूड कंट्रोलर व सहकारिता विभाग के सीओ को सौंपी गई है।
किंतु अभी तक उस पर कोई भी कार्यवाही नहीं की गई।
इतना ही नहीं हर माह जो राशन ग्राम वासियों को उपलब्ध कराया जाता है उसमें से 12 माह में से मात्र 11 माह का राशन ही ग्राम वासियों को प्राप्त होता है और दिसंबर माह का राशन उचित मूल्य दुकानों के कोटेदार व लैंप्स प्रबंधक तीरथ शुक्ला मिलकर के डकार देते हैं।
जांच से होगा खुलासा
अगर सूत्रों की माने तो 54 कुंटल राशन जो जांच में कम पाया गया था।
उसमें लगभग 8लाख का गबन तीरथ शुक्ला लैंप्स प्रबंधक के द्वारा किया गया।
जिसकी पुष्टि हम नहीं करते ऐसा सूत्र बताते हैं।
यदि जांच सही तरीके से की जाए तो पूरा सच खुद-ब-खुद सामने आ जाएगा।
अब देखते हैं कि प्रशासन व सहकारिता विभाग इसमें क्या रुख अपनाता।
