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शहडोल : धान घोटाला :  कागजों में ही बना किसान खाली स्लॉट में दर्शाया फर्जी धान , समिति का ऑपरेटर बना वसूली भाई किसान के घर जाकर वसूली फर्जी धान की रकम

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धान घोटाला :  कागजों में ही बना किसान खाली स्लॉट में दर्शाया फर्जी धान , समिति का ऑपरेटर बना वसूली भाई किसान के घर जाकर वसूली फर्जी धान की रकम

शहडोल (संजय गर्ग)  । आदिम जाति सेवा सहकारी समिति वह विभाग जहां देश के अन्नदाताओं को उनके उत्पादन के हिसाब से उचित मूल्य देकर देश के कृषकों को समृद्ध और सक्षम बनाने के लिए यह विभाग बनाया गया है।
छोटे-छोटे किसानों को उनकी पैदावार के हिसाब से शासन द्वारा उनके अनाजों का उचित मूल्य देकर देश हित में कृषक व खेती किसानी को बढ़ावा देने के लिए जहां शासन ने इस विभाग को जिम्मा सौंपा है।
वहीं सरकार की इस मंशा के ठीक विपरीत कार्य करने का काम जिले के आदिवासी अंचल शहडोल में आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में धान खरीदी के समय किए गए धान घोटाले का एक मामला प्रकाश में आया है।
जहां तिवारी की सोसाइटी में ऑपरेटर पद पर पदस्थ पांडे के द्वारा कागजों में ही किसान के खाली स्लॉट पर महज आंकड़ों में लगभग 100 क्विंटल धान दर्ज कर दिया जिसकी कानों कान भनक किसान को नहीं लगी और कृषक के ऊपर दबाव बनाकर रकम वसूली अभियान चलाया गया।
ऐसा है पूरा मामला
जिले के आदिम जाति सेवा सहकारी समिति में धान खरीदी प्रभारी बनकर ऑपरेटर के द्वारा किसान से लाखों की ठगी का मामला सामने आया है।
दरअसल किसान अपनी क्षमता के अनुरूप 80 कुंटल धान लेकर धान खरीदी केंद्र जाता है जहां पर खरीदी केंद्र प्रभारी के रूप में तिवारी के सोसाइटी में ऑपरेटर पद पर पदस्थ पांडे के द्वारा उसके धान की गिनती की जाती है और पर्ची लेने के लिए किसान को अगले दिन बुलाया जाता है।
जब दूसरे दिन किसान अपनी बेची हुई धान की पर्ची लेने खरीदी केंद्र पहुंचता है तो ऑपरेटर कम खरीदी प्रभारी पांडे के द्वारा किसान के खाली स्लॉट में 100 कुंटल धान फर्जी चढ़ा दी जाती है।
ऑपरेटर पांडे के द्वारा कहा जाता है कि यह दूसरे किसान धान है। जब पैसा तुम्हारे खाते में आ जाएगा तो तुम उसे दे देना।
जिस पर किसान और खरीदी केंद्र प्रभारी के बीच बिना पूछे धान चढ़ाने को लेकर कहा सुनी होती है। लेकिन किसान शिकायत करने की बात बोलकर वहां से चला जाता है।

वसूली भाई ने ऐसे ली किसान से रकम
धान खरीदी के कुछ समय बाद तिवारी प्रबंधक की सोसाइटी में ऑपरेटर पांडे के द्वारा वसूली भाई बनकर संबंधित किसान के पास उसके खाते में 5 माह बाद पैसे आ जाने के बाद पहुंचता है और उसे 100 कुंटल फर्जी धन जो कि किस के 179 कुंटल स्लॉट में दर्शाई जाती है उसकी रकम किसान से मांगता है।
इसके बाद सूत्रों के अनुसार संबंधित किसान के द्वारा डेढ़ लाख रुपए एवं पचास हजार रुपए दो किस्तों में ऑपरेटर पांडे को किसान अपने घर में देता है।
यह पहलू भी है विचारणीय

इस पूरे मामले में संबंधित किसान जिसके खाली स्लॉट में 100 कुंटल धान उत्पादन किसी अन्य किसान के नाम से दर्शाया जाता है। जिसकी रकम ऑपरेटर द्वारा किसान से वसूल ली जाती है। लेकिन इसमें समझने वाली बात यह है कि यदि किसी किसान की 100 कुंटल धान किसी अन्य के स्लाट में दर्शाया गया। वह संबंधित किसान ने अगले किसान से संपर्क क्यों नहीं किया।
क्यों बार-बार ऑपरेटर पांडे के द्वारा किसान पर दबाव बनाकर लाखों रुपए की रकम वसूली गई।
और क्या समिति प्रबंधक को इस विषय में कोई जानकारी नहीं थी।
बहरहाल इस धान डाले मामले में जिस तरीके से तिवारी जी की सोसाइटी में पांडे जी ने भ्रष्टाचार किया वह कहीं ना कहीं खुलकर सामने आ रहा है।

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