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शहडोल/जयसिंहनगर : क्या है 151 और 155 का खेल, प्रशासन को कर गुमराह किसानों की भूमि प्रभावित कर रहा ठेकेदार , डीएमफ मद की शासकीय राशि को हड़पने के जुगाड़ में लगा सचिव

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क्या है 151 और 155 का खेल,

 प्रशासन को कर गुमराह किसानों की भूमि प्रभावित कर रहा ठेकेदार , डीएमफ मद की शासकीय राशि को हड़पने के जुगाड़ में लगा सचिव

शहडोल (संजय गर्ग) । पंचायती राज व्यवस्था को भ्रष्टाचार की जमी जमाई व्यवस्था भी कहा जा सकता है। जहां एक और शासन प्रशासन दूर-दूर तक बैठे लोगों को शासन की सुविधा और उनकी योजनाओं से लाभान्वित करने के प्रयास पर लगा हुआ है तो वहीं दूसरी ओर पंचायती राज व्यवस्था पर ग्राम पंचायत के सचिव सरपंचों ने मानो शासन की महत्वाकांक्षी योजनाओं पर पलीता लगाने का ठेका ले रखा है ।

ऐसा ही एक मामला जिले के जयसिंहनगर जनपद के ग्राम पंचायत जोरा में सामने आया है जहां पर डीएफ मद के जरिए लगभग 25 लाख रुपए की लागत से नवीन तालाब निर्माण का कार्य किया जा रहा था।

जिस पर वहां के स्थानीय किसान की भूमि तालाब निर्माण होने से प्रभावित होती है साथ ही उक्त स्थल से लगी एमपीआरडीसी द्वारा बनाई गई रोड पर भी प्रभाव पड़ता है।

जिस पर किसान द्वारा उक्त निर्माण कार्य पर जयसिंहनगर तहसील से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया।

यहां तक यह मामला सुनने और देखने में तो सीधा-सीधा लगता है। लेकिन विषय केवल कृषि भूमि प्रभावित होने का नहीं अपितु स्थानीय प्रशासन को गुमराह करने साथ ही शासकीय राशि का गवन करने से संबंधित है।

जिसकी शिकायत किसान रामलाल तिवारी के द्वारा जिला कलेक्टर से की गई है।

 ऐसे किया प्रशासन को गुमराह

दरअसल डीएमफ मद से बन रहे नवीन तालाब निर्माण जिसकी लागत 25 लाख रुपए है। जिस पर ग्राम पंचायत जोरा सचिव शीतला प्रसाद तिवारी के द्वारा कूट रचित तरीके से उक्त तालाब निर्माण कार्य के लिए खसरा नंबर 151 की भूमि पर स्वीकृति डीएफ मद से ली गई है।

पुष्ट सूत्रों के अनुसार जिस भूमि पर निर्माण कार्य हेतु तकनीकी स्वीकृति ली गई है उसे पर नवीन तालाब का निर्माण नहीं किया गया है बल्कि किसानों की भूमि को प्रभावित करते हुए उक्त तालाब का निर्माण कार्य खसरा नंबर 155 में कराया गया है।

 पटवारी ने जांच में किया खुलासा

इस पूरे मामले में हल्का पटवारी के द्वारा अपना जांच प्रतिवेदन सोपा गया जिसमें किसानों की भूमि प्रभावित होना बताया गया । साथ ही हल्का पटवारी के द्वारा आवेदन करता भूस्वामी रामलाल तिवारी निवासी टिक्की की भूमि के जांच उपरांत यह भी खुलासा किया गया कि नवीन तालाब का निर्माण ठेकेदार और ग्राम पंचायत सचिव के द्वारा षड्यंत्रकारी तरीके से दूसरे खसरा नंबर 155 में कराया गया है। रिपोर्ट में खुलासा करते हुए पटवारी के द्वारा बताए गए की  महज 75 डिसमिल भूमि पर निर्माण किया गया है। ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि डीएमफ मद 25 लखा रुपए की शासकीय राशि का व्यय  75 डिसमिल भूमि पर नवीन तालाब निर्माण में कैसे जारी हो गया। जबकि जानकारों की माने तो उल्लिखित भूमि पर 25 लाख से काम की राशि में निर्माण कार्य पूरा हो जाना चाहिए। ऐसे में जनपद के उपयंत्रि एवम सहायक यंत्री के कार्यशैली पर लगा प्रश्न चिन्ह लग रहे हैं।

 नियम कायदों की उड़ाई धज्जियां

इस पूरे मामले में यदि नियमों की बात की जाए तो डीएमफ मद से स्वीकृत कोई भी कार्य उसी भूमि पर होगा जिस पर प्रशासन द्वारा स्वीकृति प्रदान की गई होगी लेकिन ।

ठीक इसी नियमों की तिलांजलि देते हुए शासकीय राशि के गबन के जुगाड़ में लगे सचिव शीतला प्रसाद तिवारी और ठेकेदार विनय तिवारी के द्वारा प्रशासन को गुमराह करते हुए खसरा नंबर 151 में पहले स्वीकृति ली गई और निर्माण कार्य 155 वें खसरे नंबर पर कराया गया। जो की पूर्णता नियम विरुद्ध है। और इसका खुलासा पटवारी ने अपने जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट किया है।

 ठेकेदार और पंचायत सचिव पर ऐसी लगनी चाहिए धाराएं 

इस पूरे मामले में जिस प्रकार ग्राम पंचायत जोरा के सचिव एवं ठेकेदार के द्वारा शासन को गुमराह करने का प्रयास किया गया है। जैकी पटवारी ने अपने प्रतिवेदन में स्पष्ट किया है। ऐसे में इनके ऊपर शासन को गुमराह करने और शासकीय राशि का गबन करने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत आईपीसी की धारा 406, 409, 420 और 477ए के तहत आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाना चाहिए।

 अब देखना यह होगा कि इस पूरे मामले को प्रशासन संज्ञान में लेकर क्या कार्रवाई करता है।

 इनकी प्रतिक्रिया

 इस संबंध में जब जिला पंचायत सीईओ से बात करनी चाहिए तो उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया।

मुद्रिका सिंह ( प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारी) जिला पंचायत शहडोल।

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