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शहडोल: शिक्षा माफियाओं की डकैती……………! ,लोक शिक्षण संचनालय के नियम निर्देशों को ताक पर रखकर दूसरे विद्यालय की राशि दूसरे विद्यालय में खपा दी ,8 माह से कमिश्नर के टेबल में दम तोड़ती शिक्षा अधिकारी की निलंबन फाइल ।

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शिक्षा माफियाओं की डकैती……………! ,

लोक शिक्षण संचनालय के नियम निर्देशों को ताक पर रखकर दूसरे विद्यालय की राशि दूसरे विद्यालय में खपा दी ,

8 माह से कमिश्नर के टेबल में दम तोड़ती शिक्षा अधिकारी की निलंबन फाइल ।

 


शहडोल (संजय गर्ग)। इतिहास गवाह है कि जब-जब भ्रष्टाचार के बड़े मामले जिले में प्रकाश में आते हैं तब राजा को बचाने के चक्कर में सिपाहियों का बलिदान दे दिया जाता है।
पर सवाल यह उठता है कि। कनिष्ठ कर्मचारियों पर कार्यवाही की गाज और वरिष्ठ कर्मचारियों के सर पर सजा भ्रष्टाचार का ताज क्यों????
हाल फिलहाल में जिस प्रकार की हलचल वायरल बिल होने के कारण शिक्षा विभाग में मची है। उससे जिला प्रशासन हरकत में आया है।
वैसे तो मामला प्रदेश स्तर का हो गया है।
इसी कड़ी में ब्यौहारी विकासखंड के शासकीय हाई स्कूल साखी जो हुआ उसने जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा करित भ्रष्टाचार को कहीं ना कहीं प्रमाणित कर रहा है।
और यह बताता है कि भ्रष्टाचार का कद सबसे बड़ा होता है उसके आगे लोक शिक्षण संचनालय भोपाल के विभागाध्यक्ष के बगैर निर्देशन के कैसे जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा हाई स्कूल साखी कि मरम्मत कार्य हेतु आवंटित 3 लाख रुपए को अन्य विद्यालय हाई स्कूल चरखरी को अंतरित कर दी गई।

मरम्मत कार्य न होने पर राशि करी थी वापस 

दरअसल शासकीय हाई स्कूल सखी के प्राचार्य द्वारा मरम्मत का कार्य नहीं होने के कारण लोक शिक्षण संचनालय भोपाल द्वारा स्वीकृत एवं अंतरित राशि की वापसी जिला शिक्षा अधिकारी के खाते में कर दिया गया था। 

 

शिक्षा अधिकारी ने चेक के माध्यम से अन्य विद्यालय में अंतरित की राशि 

इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी फूल सिंह मरपाची के द्वारा चेक क्रमांक 051 391 के माध्यम से दिनांक 25 जुलाई 2023 को शासकीय हाई स्कूल साखी की मरम्मत कार्य की राशि को हाई स्कूल चरखरी को अंतरित किया गया।
ऐसे दी नियमों की तिलांजलि
प्रभारी जिला शिक्षा अधिकारी के द्वारा लोक शिक्षण संचनालय मध्य प्रदेश भोपाल के अनुमति के लिए बगैर सारे नियमों को सिथिर कर अन्य विद्यालय की राशि अन्य विद्यालय को अंकित कर दी जो की भ्रष्टाचार का स्पष्ट प्रमाण है।
कमिश्नर कार्यालय में हुई थी शिकायत
इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी वित्तीय अनिताओं के कटघर पर खड़े हैं वहीं दूसरी ओर इस पूरे मामले की शिकायत शहडोल कमिश्नर को पहले ही की जा चुकी है जिसका शिकायत क्रमांक 6302 19 नंबर 2024 को की गई थी।

आठ माह से टेबल में धूल खाती फाइल
इस संपूर्ण मामले में जिला शिक्षा अधिकारी शहडोल के समस्त तथ्यों की पुष्टि कथित शिकायत क्रमांक 6302 में होती है जिसके बाद‌ जिला शिक्षा अधिकारी के ऊपर अग्रिम कार्रवाई हेतु जांच प्रतिवेदन संलग्न सह पत्रों के साथ होती है। लेकिन धीरे-धीरे यह पूरा मामला ठंडा बस्ते में चला जाता है। विश्वत सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि जिला शिक्षा अधिकारी शहडोल के निलंबन की फाइल संभाग आयुक्त शहडोल के कार्यालय में किसी बंद कमरे में दम तोड़ रही है।
तो क्या वायरल बिल में हुए वित्तीय अनियमिताओं का जो मामला प्रकाश में आया है उसमें यदि गहराई से जांच हो तो सारा मामला खुद ब खुद सामने आ जाएगा।

पेंट घोटाला लाखों नहीं करोड़ों का
इन दोनों पेंट घोटाला चर्चा का विषय सारे प्रदेश में बना हुआ है लेकिन इस समस्त घोटाले की यदि जड़ तक जाए तो यह किसी एक बिल के लाख रुपए तक सीमित नहीं है। यह विगत 3 वर्षों से लगभग कई करोड़ रुपए की वित्तीयक्षति शिक्षा विभाग को हुई है। जिसमें 28 हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी ही नहीं बल्कि पांचो विकास खंड के पांच बालिका छात्रावासो में इसी प्रकार का वित्तीयआनिमिताए हुई है।

गप्प सड़ाके में व्यस्त जांच अधिकारी
अगर बात करें वायरल हो रहे बिलों की जांच की तो उसकी जांच के लिए कलेक्टर ने निर्देश दिए थे जिसके बाद जेडी ऑफिस में सहायक संचालक आर.के. मंगलानी के द्वारा जांच की जा रही है। जेडी ऑफिस में चल रही जांच में आज जब मीडिया के द्वारा जांच अधिकारी से जांच के संबंध में सवाल पूछना चाहा तो जांच अधिकारी कार्यालय में गप्पे लड़ाते नजर आए। और जब पत्रकारों ने जांच संबंधित सवालों करने के लिए पूछा तो जांच अधिकारी किसी भी प्रकार के सवालों का जवाब देने से बचते नजर आए।

इनका कहना

इस मामले में आपको जो कुछ भी पूछना है वह आप जिला कलेक्टर से पूछिए।

सुरभि गुप्ता ( संभागायुक्त) संभाग शहडोल (म. प्र.)।

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अगले अंक में ……….

भ्रष्टाचार के और कितने हिस्सेदारा शिक्षा अधिकारी के दो चेहरे….

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