जैतपुर / शहडोल : तो क्या पुरन कि गुंडागर्दी पर कानून के रखवालो का है नरम रुख , पुलिस अधीक्षक से शिकायत ,अस्पताल में 1 घंटे तक चला पुलिस का हाई वोल्टेज ड्रामा , दबंग सचिव के हाथों बेरहमी से पिटा किसान ……
तो क्या पुरन कि गुंडागर्दी पर कानून के रखवालो का है नरम रुख , पुलिस अधीक्षक से शिकायत ,
अस्पताल में 1 घंटे तक चला पुलिस का हाई वोल्टेज ड्रामा , दबंग सचिव के हाथों बेरहमी से पिटा किसान ……
शहडोल (निशांत संजय गर्ग)। पीड़ित द्वारा लगाया गया आरोपों के अनुरूप देशभक्ति और जनसेवा का भाव तब जागृत हुआ जब बुजुर्ग किसान के मारपीट का मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। न सिर्फ वायरस बल्कि यूं कहें कि इस पूरे मामले ने कहीं ना कहीं एक बार फिर पुलिस को सवालों के कटघर पर लाकर खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर पीड़ित पक्ष ने अपने साथ हुई बर्बरता की कहानी को पत्रकारों के समक्ष रखा तो वहीं दूसरी ओर जैतपुर पुलिस के ऊपर कई गंभीर आरोंप लगाए हैं। जिसके शिकायत पुलिस अधीक्षक से की गई है।
पूरा मामला जैतपुर थाना क्षेत्र के ग्राम रसमोहनी का है जहां पर बीते 25 जुलाई 2026 को पीड़ित सत्येंद्र सिंह बारगाही के द्वारा बताया गया कि जमीन सीमांकन को लेकर जयपुर तहसील के कोटवार विष्णु सिंह के द्वारा पीड़ित सत्येंद्र को घटनास्थल पर बुलवाया। जहां पर पीड़ित अपने आरजी पेट की कृषि भूमि पर जोताई का काम कर रहा था । जहां पर वर्तमान में पंचायत खोड़री सचिव पूरन साहू का पुत्र परमानंद साहू अपना ट्रैक्टर लेकर पीड़ित के फसलों पर चढ़ा दिया सत्येंद्र बारगाही के मना करने पर उसके साथ पंचायत सचिव पूरन साहू पुत्र परमानंद साहू के द्वारा लाठी डंडों से बुरी तरीके से मारपीट की गई। पीड़ित का पुत्र जब बीच बचाव करने वहां पहुंचा तो उसके साथ भी मारपीट की गई। जिससे उसके कान में गहरी चोट आई है।
न्याय के लिए पहुंचा थाने मिली निराशा
वही इस पूरे घटनाक्रम के बाद पीड़ित ने बताया कि जब वह पूरे मामले की शिकायत लेकर जैतपुर थाने पहुंचा तो वहां पर भी उसे न्याय की जगह निराशा ही हाथ लगी। थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने मामले की गंभीरता को पर के बिना ही पीड़ित को वहां से चले जाने की नसीहत दे डाली। और कहां की आज यहां लाइट गोल है कल आना।
सवाल यह है कि घटना दिनांक को ही जब मामला थाने तक पहुंचा तो पीड़ित का बयान क्यों नहीं लिया गया। क्यों उसे तत्काल मेडिकल परीक्षण ( एमएलसी) के लिए नहीं ले जाया गया ।
वहीं पीड़ित पक्ष के आरोप है कि मौके पर 112 भी तुरंत उपलब्ध नहीं हो पाई।
जो कि कहीं ना कहीं लापरवाही और जवाबदेही जैसे शब्दों को इस पूरे मामले में विशेष जगह देते हैं।
पंचायत सचिव पर लगा मारपीट का आरोप , पीड़ित पक्ष पर एनसीआर
वहीं इस पूरे मामले ने बड़ा तूल तब पकड़ा जब घटना दिनांक को गंभीर अवस्था में मारपीट में घायल सत्येंद्र बारगाही अपनी फरियाद लेकर जयपुर थाने पहुंचा और उसकी एफआईआर घटना दिनांक को नहीं लिखी गई।
वही मारपीट में आरोपित पक्ष पंचायत सचिव पूरन साहू व उसका पुत्र परमानंद साहू ने इस घटना दिनांक को थाने पर पहुंचकर पीड़ित पक्ष के ऊपर बीएस की धारा 352 के तहत एनसीआर लिखवा दी गई।
मीडिया में उठा मुद्दा तो जिला अस्पताल पहुंचे पुलिसकर्मी
वही 27 जुलाई को समय लगभग 1:30 बजे के आसपास जब पूरा मामला तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा तो जैतपुर थाने के पुलिसकर्मी चंद्रशेखर श्रीवास्तव थाना प्रभारी के निर्देशन में जिला अस्पताल एफआईआर की कॉपी लेकर पहुंचते हैं। और कहते हैं कि चलो अपना बयान दे दो जिस पर पीड़ित सत्येंद्र बारगाही के पुत्र रोहित बारगाही के द्वारा बयान देने से मना कर दिया जाता है और कहा जाता है कि पहले हम पुलिस अधीक्षक से मिलेंगे। जिस पर पुलिसकर्मी ने बार-बार पीड़ित के ऊपर अपना बयान देने को लेकर दबाव बनाया लेकिन वहां पर मौजूद पीड़ित के परिजन एवं मीडिया के लोगों के उपस्थिति में पूरा मामला कैमरे में कैद कर लिया गया।
वही इस पूरे मामले में लगभग 1 घंटे तक हाई वोल्टेज ड्रामा जिला अस्पताल में चलाता रहा।
तो क्या बैक डेट पर हुई एफआईआर
पीड़ित के द्वारा दिए गए कथन के अनुसार घटक दिनांक को उसकी कोई भी रिपोर्ट थाने में दर्ज नहीं हुई लेकिन 27 जुलाई 2026 को एएसआई चंद्रशेखर श्रीवास्तव ने 25 जुलाई की ही एफआईआर लेकर अस्पताल पहुंचे लेकिन एफआईआर की कॉपी में पीड़ित पक्ष के किसी भी प्रकार के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान देखने को नहीं मिले।
तो क्या मीडिया पर मामला उठने के बाद लीपापोती करने के लिए बैक डेट पर फिर बनाई गई और पीड़ित सत्येंद्र बारगाही के हस्ताक्षर में अंगूठे के निशान के लिए पुलिसकर्मी को वहां भेजा गया।??? यह सबसे बड़ा सवाल है ।
वहीं जिस एफआईआर की कॉपी जिला अस्पताल में लेकर पुलिसकर्मी पहुंचा उसमें 296 (ए) 115 (2) 351 (3) 3 (5) बीनएस की धाराओं के तहत मामला दिख रहा है।
लेकिन वही पीड़ित सत्येंद्र बारगाही के अब तक के हुए मेडिकल परीक्षण यह बताते हैं कि । उसके पैर की हड्डी टूट चुकी है साथ ही उसके हाथ पर काफी गंभीर चोटें आई है। जो कि उसके शरीर के जख्म यह स्पष्ट रूप से दर्शाते हैं कि यह पूरा मामला 307 का है। जिस पर मेडिकल रिपोर्ट के बाद स्पष्टता आएगी।
यह भी विचारणीय
वहीं इस पूरे मामले में अब तक जो भी पीड़ित पक्ष के बयान एवं 27 जुलाई 2026 के अस्पताल में हुए घटनाक्रम से यह बात तो स्पष्ट हो गई कि कहीं ना कहीं इस पूरे मामले में आरोपित पक्ष पंचायत सचिव पूरन साहू को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। जिसकी शिकायत जिले की पुलिस कप्तान से पीड़ित द्वारा की गई है एवं न्याय की मांग करते हुए। आरोपित पक्ष के ऊपर पीड़ित पक्ष एवं उसके परिजनों के द्वारा 307 के मुकदमे की मांग की जा रही है।

