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शहडोल : शिक्षा विभाग की माया अपार…………….! ,मैं शिक्षक हूं,मुझे कक्षा में जाकर पढ़ाने दो सरकार।

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शिक्षा विभाग की माया अपार…………….! ,

मैं शिक्षक हूं,मुझे कक्षा में जाकर पढ़ाने दो सरकार।

शहडोल (संजय गर्ग) । रोज सुबह जागते ही शैक्षणिक गुणवत्ता बढ़ाने का लक्ष्य लेकर
घर-परिवार का काम निपटाते हुए विषयवार पाठ योजना बनाता हूं कि आज कक्षा में 10 से 5 बजे तक उपस्थित रहकर बच्चों को पढ़ाऊंगा तो मोबाईल से आनलाईन ई-अटेडेंस एप लगाने की जल्दी में गाड़ी पंचर हो या एक्सीडेंट का तनाव का नया एफएलएन का अंकुर फूट जाता है,ट्रैकर शीट में पाठ्यक्रम पीछे छूट जाता है, सोचता हूं,शाला में अकेला शिक्षक के द्वारा 5 कक्षाओं के 18 विषय,18 एफएलएन,,एट ग्रेट,प्रयास आदि पुस्तकें ही गिनने में कैसे होगा निपुण भारत!
जैसे तैसे आफलाईन विषयों से निपटे नहीं कि आनलाईन माथा-पच्ची शुरू
अधिकारियों का फोन आता है आपके विद्यालय में अभी तक पुस्तकों का आनलाईन वितरण नहीं हुआ है,जबकि बच्चे कक्षा में वही पुस्तकें पढ़ रहे हैं,कक्षा पहली में नामांकन नहीं हुआ जबकि 10 बच्चों को भर्ती कर कक्षा में पढ़ा रहे हैं। सभी कक्षाओं की परीक्षा हो गई,5 वी के 15 बच्चे माध्यमिक विद्यालय में कक्षा 6 में भर्ती होकर पढ़ने लगे लेकिन अधिकारी बोल रहे हैं कि अभी आपके विद्यालय से ये 15 बच्चों का कक्षा अपडेशन नहीं हुआ है,
शिक्षा विभाग की माया अपार कि शिक्षक समग्र आईडी, आधार कार्ड नहीं बना सकता लेकिन मेपिंग व अपार आईडी नहीं बनने का दोषी शिक्षक!
मैदान में पेड़ न हो लेकिन वायुदूत एप पर फोटो जरुरी है,विद्याजंली पोर्टल,एम शिक्षा मित्र, सार्थक एप,दिक्षा प्रशिक्षण एप,मेपिंग,अपार,यू-डाईस पर आनलाईन कार्य, पुस्तक ट्रैकिंग एप, एजुकेशन पोर्टल 3.0, पीएम पोषण एप,वेबेक्स एप,स्विफ्ट चैट,निहार शांति अंग्रेजी पाठशाला,सहित लगभग 27 आनलाईन गतिविधियों को शिक्षकों को करवाने हेतु मजबुर ऐसे किया जा रहा है जैसे वह शिक्षक न होकर साफ्टवेयर इंजीनियर हैं या एमपी आनलाईन कियोस्क सेंटर का कम्प्यूटर आपरेटर है।*
बैंक हर तीन महीने में लेन-देन नहीं होने से खाता गलत छात्रवृत्ति, गणवेश, सायकल वितरण न होने का दोषी शिक्षक।
*जनपद पंचायत अंतर्गत मध्यान्ह भोजन वितरण,निर्माण स्व सहायता समूह करें, खाद्यान्न न उठाए, भोजन न बनाएं और पीएम पोषण पर एसएमएस न करें , भोजन का सेम्पल नहीं रखा,दाल में कीड़े हो तो निरीक्षण का अधिकार नहीं लेकिन दोषी शिक्षक!*
परसराम कापड़िया की नजर में यदि इतना काम करने के बाद भी सरकारी स्कूलों का परिणाम निजी स्कूलों से श्रेष्ठ है फिर भी अंत में बच्चे फैल हो तो दोषी शिक्षक यही नहीं बच्चों के माता-पिता को पढ़ाने का काम भी नवभारत साक्षर मिशन में प्रौढ़ शिक्षा एप में तथा बच्चों की आनलाईन कक्षाओं का होमवर्क भी शिक्षकों को ही करना है।
बीएलओ सहित अन्य विभागों के अन्य गैर शैक्षणिक कार्यों का भूत कंधे से उतरता नहीं।
डीपीआई भोपाल के किसी भी अधिकारी से ज्यादा काम करने वाले शिक्षक की 20 वर्ष की नौकरी खा गए, अवकाश नगदीकरण,ग्रेच्युटी व पेंशन खा गए, फिर भी दोषी शिक्षक हैं।

सवाल : अन्य कामों से जब तक नहीं मिलेगी मुक्ति तो कैसे शिक्षक कर पाएगा अध्यापन कार्य।, 

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हालांकि शिक्षा विभाग में कुछ ऐसे भी शिक्षक हैं जो पढ़ना छोड़ बाबू गिरी करने में ज्यादा माहिर है प्रशासन की आंखों में धूल झोंक कर अटैचमेंट का मजा लूटते हैं तो वही प्रति नियुक्ति वाले छोड़कर कार्य आदेशित सीएससी बॉस बनकर सवेरे से निकलते हैं और शाम तक स्कूलों में विचरण करते हैं। अध्यापन कार्य छोड़कर मटरगश्ती करने का वेतन शासन से लेते हैं।
निष्कर्ष
शासन प्रशासन और संबंधित विभाग आपसी सामंजस बनाकर अपने स्तर पर जांच और परीक्षण करें। और सबसे पहले प्राथमिकता बच्चों के अध्यापन को दें।

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