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शहडोल : त्रिदेव के क्रोध ऊर्जा से हुई  मां चंद्रघंटा की उत्पत्ति चैत्र नवरात्र का आज तृतीय दिवस

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त्रिदेव के क्रोध ऊर्जा से हुई  मां चंद्रघंटा की उत्पत्ति चैत्र नवरात्र का आज तृतीय दिवस

शहडोल (संजय गर्ग ) ।  चैत्र नवरात्रि का आज यानी 1 अप्रैल को तृतीय दिन है।

आज के दिन मां आदिशक्ति जगत जननी के तृतीय स्वरूप देवी चंद्र घंटा की आराधना की जाती है।

इस दिन जो लोग कठिन व्रत का पालन कर मां का पूजन करते हैं उन्हें शुभ फल की प्राप्ति होती है।

और उनके जीवन में शुभता आती हैं।

 इस कथा के बिना अधूरी है मां के इस स्वरूप की पूजा

पौराणिक मान्यताओं एवं धार्मिक पुराने के अनुसार धरती पर दनवों के बढ़ते आतंक को समाप्त करने हेतु देवी दुर्गा ने यह स्वरूप धारण किया था।

उसके पीछे प्रचलित कथा यह भी है कि महिषासुर नामक दानव ने देवराज इंद्र के सिंहासन पर कब्जा करने एवं स्वर्ग लोक पर अपना आधिपत्य जमाने की मंश बनाई जब देवताओं को इसका पता चला तो वह काफी चिंतित हो गए।

इसके बाद समस्त देवताओं ने त्रिदेव से सहायता मांगी और जब यह बात देवताओं को ब्रह्मा विष्णु , महेश ,अर्थात त्रिदेव को बताई तो त्रिदेव काफी क्रोधित हो गए।

त्रिदेव की अत्यधिक क्रोध से तीनों के मुख से जो क्रोध ऊर्जा उत्पन्न हुई उससे मां चंद्रघंटा की उत्पत्ति हुई।

इसके बाद भगवान शिव ने अपना त्रिशूल एवं भगवान विष्णु ने अपना सुदर्शन चक्र मां को प्रदान किया।

साथी देव राज इंद्र ने मां को अपना एक घंटा प्रदान किया ।

तत्पश्चात महिषासुर का संघर्ष करने के लिए मां ने उसका सामना किया।

माता रानी के दिव्य स्वरुप को देखकर दानवों का राजा महिषासुर भयभीत हो गया।

इसके बाद मां ने महिषासुर का वध कर देवताओं की रक्षा करते हुए स्वर्ग को दानवों से मुक्त कराया ।

तब से लेकर आज तक प्रत्येक नवरात्रि पर तृतीय दिन मां चंद्रघंटा की पूजा की जाती है।

कठिन व्रत के पश्चात मां के इस कथा का पाठ करना आवश्यक होता है।

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